भगवान परशुराम जी की एक शोभा यात्रा एक जूटता होने का सन्देश देगा

ब्राम्हण तभी एक हो सकता है जब ओ भगवान परशुराम जी के जयन्ती पर भगवान परशुराम जी को 10/15/ हिस्सो मे बाट कर अलग अलग मोहल्लो मे जयन्ती के दिन घुमाना चन्द लोगो को लेकर बन्द करे ब्राम्हण समाज मे सब अपने अपने संस्था संगठन,सभा को भले ही अलग-अगल कर समाज के लिये कार्य करे मगर भगवान परशुराम जयन्ती के दिन सभी संगठन एक जूट होकर एक विशाल सोभा यात्रा निकाले जिसमे सभी सम्मलित हो ईसकी एक बैठक बुलाकर
सभी संगठनो से एक एक अध्यक्ष मिलकर भगवान परशुराम शोभा यात्रा समिति नयी संस्था बना ले जिसका एकमात्र कार्य सिर्फ शोभा यात्रा निकालने का हो आप भले अपने अपने संगठन मे अलग-अगल रहो
बस आप सब से हाथ जोड़कर नम्र निवेदन, विनम्र निवेदन, विनती है सभी संगठन के अलग अलग हो मगर कहलाते ब्राम्हण हो तो अपनी तरह भगवान परशुराम जी जो सब के एक है तो उनको अलग-अगल मोहल्ले मोहल्ले क्यो बाट रहे और ये कहते हो ब्राम्हण सभी एक जुट हो अगर ब्राम्हण एकजुट हो कहते तो जो भगवान परशुराम जी एक है उनको क्यो बाट रहे जयन्ती के दिन ही एक जुट हो सकता है अगर सिर्फ सब संगठन बैठक कर भगवान परशुराम जी की 2026 मे पडने वाले भगवान परशुराम जयन्ती के दिन एक होकर एक भब्य दिब्य सुन्दर विशाल शोभायात्रा निकालो तो आपकी क्या ताकत है जो आपको गाली कभी कभी देते है उनको आपकी अहमियत का पता चलेगा तब लगेगा ब्राम्हण एक जुट हो गया किसी कि तब आपके ब्राम्हणत्व को ललकारने की हिम्मत नही पढेगी
आपके परिवार का एक छोटा सदस्य राजेंद्र कुमार तिवारी दुकानजी कह रहे जिस दिन सिर्फ भगवान परशुराम जयन्ती की शहर प्रयागराज के सड़क पर एक शोभायात्रा निकलेगी उसी दिन पता चलेगा आप एक दिन तो एक जुट हुये तभी लगेगा की आप ब्राम्हण है जो हमेशा दूसरो को राह दिखाता है आज खुद बट रहा और भगवान परशुराम जी को बाटकर मुहल्ले मुहल्ले 20/25 लोगो के साथ घुमाकर वावाही लुट रहे अगर जब तक जो संगठन साल मे अपनेसंस्था,सभा,सगठन के जो कार्यक्रम हो उसमे भी आप सभी ब्राम्हण समाज के बने सगठनो को निमन्त्रण देकर आमन्त्रित करे बुलाये तब भी लोग जाने की ब्राम्हण एक जुट है जब ये नही कर सके आजतक तो चाहे लखनऊ या दिल्ली मे एकत्र हो कर कहो हम एक जुट है
ये तभी होगा गारन्टी के साथ जब हर शहर मे भगवान परशुराम जी की एक हि भब्य दिब्य सुन्दर विशाल शोभा यात्रा निकलेगी भगवान परशुराम जी को अब मोहल्ले मोहल्ले घुमाना बन्द करे अपने ऐक जुट होने का परिचय देने की सुरूवात करे जब तक एक शोभा यात्रा से नही सुरूवात करेगे भले ही
हमारी बात बुरी लग रही होगी , बुरी लगेगी सायद आपसब को यह बात अब अपने को धोखा देना बन्द कर भगवान परशुराम जी को मोहल्ले मोहल्ले घुमाकर अपने साथ उनकी तो बेसती न करे ये कटु सत्य हे यही दुकानजी की बात मान कर सिर्फ ऐक दिन सब एक जुट हो भगवान परशुराम जी की जयन्ती के दिन अहम,अहंकार, तै बडा,मै बडा,सब त्यागकर भगवान परशुराम जी के लिये तो झूक सकते है सिर्फ एक दिन के लिए फिर देखिये आप अपनी पहचान के मोहताज नही रहेगे

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