प्रयागराज। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में झूंसी स्थित पलटन मॉल में जन गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों ने सहभागिता करते हुए राष्ट्र निर्माण, सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी, आत्मनिर्भर भारत तथा भारतीय संस्कृति एवं संस्कारों के संरक्षण जैसे विषयों पर विचार-विमर्श किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं वंदे मातरम् गीत से हुआ। मुख्य अतिथि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, प्रयागराज के विभाग प्रचारक आदरणीय सुबन्ध शुभेंदु जी ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपनी स्थापना से लेकर आज तक समाज में सेवा, संस्कार, अनुशासन और राष्ट्रभावना को मजबूत करने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। संघ के शताब्दी वर्ष का उद्देश्य केवल एक वर्ष का उत्सव मनाना नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति को राष्ट्रहित और सामाजिक दायित्व से जोड़ना है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्र की प्रगति तभी संभव है, जब समाज का प्रत्येक वर्ग अपनी जिम्मेदारी समझते हुए सकारात्मक भूमिका निभाए। स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग को बढ़ावा देते हुए उन्होंने स्थानीय उत्पादों को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि स्थानीय उत्पादों और कारीगरों को प्रोत्साहन देने से आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को मजबूती मिलेगी तथा समाज के अंतिम व्यक्ति को आत्मनिर्भर बनाने में भी महत्वपूर्ण योगदान होगा।
गोष्ठी में परिवार व्यवस्था और संस्कारों पर विशेष चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान समय में युवा पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, इतिहास और पारिवारिक मूल्यों से जोड़ना आवश्यक है। संयुक्त परिवार की भावना को मजबूत करने की आवश्यकता है, अन्यथा आने वाली पीढ़ियां चाचा, ताऊ, मौसी और बुआ जैसे आत्मीय रिश्तों की गहराई से दूर होती चली जाएंगी। बच्चों को संस्कारयुक्त शिक्षा देने के साथ-साथ देश के वीरों की गाथाएं और गौरवशाली इतिहास सुनाकर उनमें राष्ट्रभावना एवं सामाजिक दायित्व की चेतना विकसित की जानी चाहिए।
वक्ताओं ने कहा कि समाज के कमजोर, जरूरतमंद और वंचित वर्गों की सेवा करना प्रत्येक नागरिक का दायित्व है। पर्यावरण संरक्षण के लिए अधिक से अधिक पौधरोपण करने तथा जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाने पर भी जोर दिया गया।
गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए रजनीकांत, प्रांत सहसंयोजक, एनजीओ प्रकोष्ठ ने कहा कि हम सभी के अभिभावक एवं मार्गदर्शक विभाग प्रचारक आदरणीय सुबन्ध शुभेंदु जी का पावन सान्निध्य एवं मार्गदर्शन प्राप्त होना हम सभी के लिए अत्यंत सौभाग्य और गौरव का विषय है।
उन्होंने कहा, “आदरणीय शुभेंदु जी, आप जैसे तपस्वी, संस्कारवान एवं राष्ट्रसेवा को अपना जीवन समर्पित करने वाले संतस्वरूप व्यक्तित्व का हमारे प्रांगण में पधारना हमारे लिए किसी पुण्य अवसर से कम नहीं है। आपके ओजस्वी विचारों, सरल व्यक्तित्व और राष्ट्रहित के प्रति समर्पण ने हम सभी को नई ऊर्जा, प्रेरणा और दिशा प्रदान की है। आपके मार्गदर्शन से निश्चित रूप से यह प्रांगण आने वाले समय में सेवा, स्वदेशी, आत्मनिर्भरता और समाजहित के अनेक संकल्पों का केंद्र बनेगा।”
रजनीकांत ने कहा कि समाज को स्वदेशी वस्तुओं को अपनाने के साथ सरकार की ओडीओपी (One District One Product) योजना का लाभ उठाना चाहिए। स्थानीय उत्पादों, कारीगरों और छोटे उद्यमियों को प्रोत्साहन देकर आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में समाज महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और आर्थिक रूप से कमजोर एवं अंतिम व्यक्ति को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी सार्थक प्रयास होगा।
गोष्ठी में उपस्थित लोगों ने संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर सेवा, संस्कार, सामाजिक समरसता, स्वदेशी और राष्ट्रहित को जीवन का आधार बनाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।
इस अवसर पर रजनीकांत, दिलीप जी, डॉ. दीपक, राजेश वर्मा, संतोष पांडेय, पवन श्रीवास्तव, अमरीश कांत, कुरिद्धि, जेपी सिंह पटेल सहित संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता एवं बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
गोष्ठी के अंत में आयोजकों ने सभी अतिथियों एवं उपस्थित जनों के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम के माध्यम से राष्ट्र, समाज, संस्कृति, परिवार और पर्यावरण के प्रति नागरिक जिम्मेदारी को मजबूत करने का संदेश दिया गया।
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