पारंपरिक व्यवस्था की सीमा और नवाचार की आवश्यकता
वर्तमान में एलएचबी कोचों में केबिन स्तर पर केवल दो डस्टबिन उपलब्ध होते हैं, जिनकी कुल क्षमता लगभग 15-20 लीटर ही होती है। लंबी दूरी की यात्राओं के दौरान कचरा अधिक एकत्र होने के कारण ये डस्टबिन शीघ्र भर जाते हैं, जिससे केबिन में कचरा फैलने लगता है और यात्रियों को असुविधा होती है।
प्रणाली की संरचना एवं कार्यप्रणाली
इस समस्या के स्थायी समाधान हेतु झांसी कारखाने ने तीन प्रमुख घटकों को एकीकृत किया है:
1. गारबेज ड्रॉप बॉक्स: यात्रियों की सुलभ पहुंच के लिए कोच के फर्श पर सुरक्षित रूप से स्थापित।
2. सेंट्रल कनेक्टर (संबद्धक): केबिन फ़्लोर और अंडरगियर के बीच स्थापित, जो कोच की मूल संरचना को प्रभावित किए बिना कचरे को नीचे भेजता है।
3. गारबेज कलेक्टर (संग्राहक): ट्रेन के निचले ढांचे (अंडरगियर) में सुरक्षित रूप से स्थापित स्टेनलेस स्टील संग्रह टैंक।
गुरुत्वाकर्षण पर आधारित इस प्रणाली में कचरा डालते ही वह तुरंत सीधे अंडरकलेक्टर में चला जाता है, जिससे केबिन में बदबू और गंदगी की संभावना समाप्त हो जाती है।
प्रमुख विशेषताएं एवं लाभ:
• क्षमता में अभूतपूर्व वृद्धि: कचरा भंडारण क्षमता 18 लीटर से बढ़कर 367.4 लीटर (20 गुना से अधिक) हो गई है।
• आसान सफाई और निष्कासन: संग्राहक टैंक में विशेष 3:10 टेपर डिज़ाइन दिया गया है, जिससे गंतव्य/डिपो पर कचरे को तेजी से और आसानी से निकाला जा सकता है।
• उत्कृष्ट स्वच्छता: ड्रॉप बॉक्स और कलेक्टर दोनों की दो-तरफा धुलाई और सैनिटाइजेशन की सुविधा।
• बार-बार खाली करने से मुक्ति: लंबी यात्राओं के दौरान डस्टबिन को बार-बार खाली करने की आवश्यकता समाप्त होगी।
• स्वच्छ रेल, स्वच्छ पटरी: पटरियों पर कचरा फेंकने की समस्या पर प्रभावी रोक लगेगी।
वर्तमान स्थिति एवं भावी योजना
झांसी कारखाने द्वारा इस प्रणाली को एक प्रोटोटाइप एलएचबी कोच में सफलतापूर्वक स्थापित कर लिया गया है। इस नवाचार को औपचारिक निरीक्षण हेतु अनुसंधान अभिकल्प और मानक संगठन (RDSO) को प्रस्तुत किया गया है। आरडीएसओ के निरीक्षण एवं सुझावों के उपरांत इसे भारतीय रेल के एलएचबी कोचों में व्यापक स्तर पर लागू किया जाएगा।
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