प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि प्रस्तावित कानून मौजूदा नियामक व्यवस्था की जगह ऐसी व्यवस्था लागू करेगा, जो देशभर के धर्मार्थ संस्थानों पर प्रतिकूल प्रभाव डालेगी। इसने शाह को सौंपे गए ज्ञापन में कहा कि अगर सरकार विधेयक वापस नहीं लेना चाहती है, तो उसे विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम, 2010 की व्यापक समीक्षा के साथ इसे संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) को भेजना चाहिए।
प्रतिनिधिमंडल ने मौजूदा अधिनियम की धारा 15 को भी हटाने की मांग की। विल्सन की अध्यक्षता वाले जॉइंट एक्शन फोरम ऑन माइनॉरिटीज के एक बयान के अनुसार, इस प्रतिनिधिमंडल में अलग-अलग ईसाई समुदायों के प्रतिनिधि, आर्कबिशप अनिल काउटो, सीएसआई मॉडरेटर के. रूबेन मार्क, प्रचारक पॉल दिनाकरन, कैथोलिक बिशप्स कॉन्फ्रेंस ऑफ इंडिया , नेशनल काउंसिल ऑफ चर्चेज इन इंडिया और चर्च ऑफ नॉर्थ इंडिया के प्रतिनिधि शामिल थे।
प्रतिनिधिमंडल में शामिल प्रमुख चेहरे
‘जॉइंट एक्शन फोरम ऑन माइनॉरिटीज’ (Joint Action Forum on Minorities) द्वारा जारी बयान के अनुसार, सांसद पी. विल्सन की अगुवाई वाले इस प्रतिनिधिमंडल में देश के प्रमुख ईसाई समुदायों और संगठनों के शीर्ष प्रतिनिधि शामिल थे:
आर्कबिशप अनिल काउटो
सीएसआई (CSI) मॉडरेटर के. रूबेन मार्क
प्रचारक पॉल दिनाकरन
कैथोलिक बिशप्स कॉन्फ्रेंस ऑफ इंडिया (CBCI) के प्रतिनिधि
नेशनल काउंसिल ऑफ चर्चेज इन इंडिया (NCCI) के प्रतिनिधि
चर्च ऑफ नॉर्थ इंडिया (CNI) के प्रतिनिधिप्रतिनिधिमंडल ने उम्मीद जताई है कि गृह मंत्रालय सामाजिक और धर्मार्थ संगठनों के व्यापक हित में उनकी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करेगा।
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