बारिश में भीगते हुए डीएम कार्यालय पहुंचा पीड़ित, मां संकटा धाम मंदिर से करोड़ों की संपत्ति गायब होने का लगाया आरोप

गेगासों स्थित प्रसिद्ध शक्तिपीठ के घंटे व सोने-चांदी के आभूषण चोरी होने का दावा, निष्पक्ष जांच और एफआईआर की मांग

रायबरेली, 06 अगस्त। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के बीच गुरुवार सुबह एक ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। सरेनी थाना क्षेत्र के गेगासों स्थित प्रसिद्ध मां संकटा धाम मंदिर से करोड़ों रुपये मूल्य के घंटे और बहुमूल्य सोने-चांदी के आभूषण गायब होने का आरोप लगाते हुए पीड़ित अपूर्व शुक्ला भीगते हुए जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे और पूरे मामले में निष्पक्ष जांच एवं दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की।पीड़ित ने जिलाधिकारी को दिए गए प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया कि मंदिर प्रबंधन से जुड़े कुछ लोगों ने सुनियोजित तरीके से मंदिर की बहुमूल्य संपत्ति को गायब कर दिया। शिकायत में देशराज यादव, हल्का लेखपाल नीरज कुमार तथा मंदिर ठेकेदार कुलदीप उर्फ सोनू मिश्रा का नाम लेते हुए पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कर एफआईआर दर्ज कराने की मांग की गई है।प्रार्थना पत्र के अनुसार, मां संकटा धाम मंदिर देश के प्रमुख शक्तिपीठों में शुमार है, जहां प्रतिवर्ष लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। शिकायतकर्ता का दावा है कि वर्ष 2024 की नीलामी के समय मंदिर में लगभग 58 कुंतल से अधिक पीतल के घंटे, सोने का छत्र, सीतारामी हार, चांदी का मुकुट तथा अन्य बहुमूल्य आभूषण मौजूद थे। आरोप है कि यह समूची संपत्ति अब गायब है, जिसकी अनुमानित कीमत करीब एक करोड़ रुपये बताई गई है।
शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि इस मामले में पहले मुख्यमंत्री सहित कई अधिकारियों को प्रार्थना पत्र देकर कार्रवाई की मांग की जा चुकी है, लेकिन अब तक न तो मुकदमा दर्ज हुआ और न ही किसी आरोपी के खिलाफ कोई प्रभावी कार्रवाई की गई। इससे श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों में आक्रोश व्याप्त है तथा धार्मिक आस्था को ठेस पहुंचने की बात कही जा रही है।मूसलाधार बारिश के बीच जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे पीड़ित ने प्रशासन से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष एवं उच्च स्तरीय जांच कराते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई और तत्काल एफआईआर दर्ज कराने की मांग की है।अब निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं। जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि शिकायत में लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और प्रशासन इस संवेदनशील मामले में क्या कार्रवाई करता है।

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