उन्होंने पहले भी इन्हें “असफल या कम से कम बेनतीजा” बताया था, लेकिन इस बात पर जोर दिया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस काम के लिए प्रतिबद्ध हैं, “अगर हालात और कारक ऐसे बदल जाएं जिनसे यह मुमकिन हो सके”। रूबियो ने पत्रकारों से कहा, “चुनौती यही रही है – एक ऐसा समाधान जिसे दोनों पक्ष स्वीकार कर सकें। हमने कोशिश की है और आगे भी कोशिश करते रहेंगे कि कोई बीच का रास्ता निकल सके।
और अगर मौका मिला, तो हम वह भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं।” उन्होंने दक्षिण-पूर्व एशियाई राष्ट्रों के संगठन (आसियान) के विदेश मंत्रियों की वार्षिक बैठक के इतर लावरोव और चीन के विदेश मंत्री समेत कई नेताओं के साथ मुलाकात की। अमेरिका के शीर्ष राजनयिक ने कहा कि ईरान के साथ लड़ाई तेज करने, यूक्रेन में रूस के युद्ध को खत्म करने का रास्ता खोजने और क्यूबा सरकार पर बदलाव के लिए दबाव डालने के बावजूद अमेरिका का ध्यान एशिया पर केंद्रित है। मंगलवार से बंद कमरे में जारी तीन दिवसीय वार्ता में पश्चिम एशिया में फिर तेज हुए संघर्ष, रूस-यूक्रेन युद्ध और दक्षिण चीन सागर की स्थिति प्रमुख मुद्दे रहे।
दक्षिण चीन सागर में बृहस्पतिवार को एक नया टकराव भी सामने आया। रूबियो ने कहा, “हमेशा यह चिंता बनी रहेगी कि अमेरिका एक जगह पर इतना ज़्यादा ध्यान दे रहा है कि वह दूसरी जगह पर ध्यान नहीं दे पा रहा है।” उन्होंने हालांकि कहा कि अमेरिका इस क्षेत्र में मजबूत साझेदारी और आर्थिक संबंधों के कारण “हर दिन एशिया में सक्रिय” रहता है। रूबियो से मुलाक़ात के बाद, लावरोव ने पत्रकारों के सवालों को ज़्यादातर नज़रअंदाज़ कर दिया।
मॉस्को में रूसी विदेश मंत्रालय ने कहा कि उन्होंने रूबियो से साफ कहा कि यूक्रेन को और हथियार देना “मंज़ूर नहीं है”। रूसी मंत्रालय ने कहा कि लावरोव ने “टकराव के राजनीतिक और कूटनीतिक समाधान” के लिए रूस की तैयारी और पिछले साल अलास्का में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन तथा ट्रंप के बीच हुई शिखर बैठक में हुए समझौतों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को फिर से दोहराया। रूबियो ने हालांकि कहा, “हमें नए सुझाव और नए विचार खोजने होंगे” जो दोनों पक्षों को स्वीकार्य हों।
उन्होंने कहा कि यूक्रेन के लिए वॉशिंगटन की सैन्य मदद में कोई बदलाव नहीं हुआ है, और नाटो सहयोगी देश हथियार खरीदकर युद्ध से तबाह हुए इस देश को भेज रहे हैं।
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