अमर शहीद चन्द्रशेखर आजाद जी की 120वीं जयंती धूमधाम से मनाया गया

​अमर शहीद चन्द्रशेखर आजाद एवं शहीद-ए-आजम भगत सिंह स्मारक समिति के तत्वाधान में वीर शिरोमणि अमर शहीद चन्द्रशेखर आजाद जी की 120वीं जयंती आजाद पार्क प्रतिमा के समक्ष श्रद्धापूर्वक मनायी गयी। उपस्थित देशभक्तों व अतिथियों की क्रान्तिकारी परम्परा अमर रहे, वन्दे मातरम्, इंकलाब जिन्दाबाद के गगनभेदी नारे लगाये। तत्पश्चात् उ0प्र0 सशस्त्र पुलिस बल के जवानों द्वारा 21 गन शाट फायर कर सम्मान गादर द्वारा सलामी व पुलिस बैण्ड द्वारा राष्ट्र भक्ति ध्वनि बजाकर उ0प्र0 शासन की ओर से सम्मान प्रकट किया। अतिथिगण व अन्य मंचासीन होने के पूर्व स्वतंत्रता सेनानी लल्लू मरकरी के तैल चित्र पर माल्यार्पण किया। विभिन्न विद्यालयों के छात्र/छात्राओं ने देशभक्ति पूर्ण गायन, वादन, नृत्य तथा लघुनाटिका का मंचन कर जनसमूह से वाहवाही बटोरी। कार्यक्रम की शुरूआत वन्देमातरम् राष्ट्रगीत एनी बेसेन्ट की शिक्षिका सुधा रानी व अर्चना शुक्ला द्वारा हुआ।
​कार्यक्रम के मुख्य अतिथि नीरज मिश्रा उपनियंत्रक नागरिक सुरक्षा कोर ने कहा कि अमर शहीद चन्द्रशेखर आजाद जी हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन आर्मी कमाण्डर-इन-चीफ थे जो कि क्रान्तिकारी शौर्य वीरता, त्याग, देशभक्ति आदि के ही प्रतीक नहीं वे क्रान्तिकारी रणनीति व उसके दर्शन, समाजवादी लक्ष्य और उसके लिए शहादत तक अविरण प्रयत्न के भी प्रतीक हैं। आजाद जी 1921 से असहयोग आन्दोलन संस्कृत कालेज बनारस पर धरना देते समय 15 वर्ष की उम्र में पकड़े गये थे। अब तक वे आजाद नहीं बल्कि केवल चन्द्रशेखर तिवारी के नाम से ही पहचाने जाते थे। चन्द्रशेखर जी के साथ जो विद्यार्थी गये थे उन्हें कठोर कारावास का दण्ड दिया गया और चन्द्रशेखर की उम्र 15 वर्ष से कम होने के कारण उन्हें 15 बेतों की सजा का आदेश हुआ। उस वक्त लोगों की उम्मीद थी कि चन्द्रशेखर माफी माँगकर छूट जायेगें परन्तु चन्द्रशेखर जी ने माफी नहीं माँगी।
​विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ समाजसेवी सुमित बनर्जी (ए0एच0 व्हीलर) ने कहा कि आजाद पार्क किसी तीर्थस्थान से कम नहीं है। हर कोई यहाँ आकर अपने को धन्य समझता है। इसी स्थान पर अमर शहीद चन्द्रशेखर आजाद क्रान्तिकारियों के साथ 27 फरवरी 1931 को गुप्त योजना बना रहे थे। किन्तु मुखबिर की सूचना पर पुलिस कप्तान नाट बाबर ने दलबल के साथ अल्फ्रेड पार्क को चारों तरफ से घेरकर आजाद जी को ललकारा। चन्द्रशेखर आजाद जो कि स्वयं अचूक निशानेबाज थे। अपनी ब्रिटिश पिस्टल कोल्ट (बमतुल बुखारा) की पहली गोली से नाट बाबर की कलाई जख्मी कर दिया लेकिन सैकड़ों पुलिस कर्मियों से लड़ते हुए अन्तिम गोली को अपनी कनपटी पर दागकर सदा के लिए अमर हो गये।
​कार्यक्रम की अध्यक्षता राजू जायसवाल मरकरी ने किया तथा संचालन महासचिव राजबहादुर गुप्ता ने किया व श्री अनिल कुमार चीफ वार्डेन ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
​कार्यक्रम में सर्वश्री जगदीश प्रसाद उद्यान अधीक्षक, राकेश कुमार तिवारी सीनियर ए0डी0सी0, विशाल गुप्ता, प्रदीप कुमार मिश्र (अंशुमन) पूर्व अध्यक्ष, प्रभाकान्त मिश्र, आशुतोष द्विवेदी, अनुपम गुप्ता, रविशंकर द्विवेदी, रघुनाथ द्विवेदी, शिवदत्त साहू, आर0पी0 सिंह बघेल, कुँवर धनन्जय सिंह, श्रीकृष्ण तिवारी, डाॅ0 जयप्रकाश शर्मा, पूनम गुप्ता, अजेन्द्र गौड़, मुकेश जायसवाल अन्ना जी, नीलम, वन्दना, सीमा निषाद, प्रीति साहू, रेनू श्रीवास्तव, जलज तिवारी, प्रभात श्रीवास्तव, कमाल अहमद आदि लोग उपस्थित रहे।

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