शांतिकाल के दौरान वैश्विक स्तर पर कारोबार होने वाले कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी संकरे जलमार्ग से होकर गुजरता था। पाकिस्तान इस विवाद में अहम मध्यस्थ माना जाता है। हालांकि, अभी यह साफ नहीं है कि युद्ध खत्म करने के लिए कोई नया समझौता हो सकेगा या नहीं। दोनों देशों के बीच पिछले महीने हुआ अस्थायी समझौता अब टूट चुका है। वहीं, होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही भी लगभग रुक गई है।
कूटनीतिक हल की तलाश: इस्लामाबाद पहुंचे ईरानी गृह मंत्री
युद्ध को टालने और स्थिति को नियंत्रित करने के उद्देश्य से कूटनीतिक स्तर पर हलचल तेज हो गई है। ईरान के गृह मंत्री बातचीत के सिलसिले में पाकिस्तान पहुंचे हैं। इस पूरे विवाद में पाकिस्तान को एक महत्वपूर्ण मध्यस्थ माना जा रहा है।
दोनों देशों के बीच शांति बहाली की राह इतनी आसान नज़र नहीं आ रही:
समझौता टूटा: अमेरिका और ईरान के बीच पिछले महीने हुआ अस्थायी संघर्ष-विराम समझौता अब पूरी तरह टूट चुका है।
अनिश्चितता बरकरार: फिलहाल यह साफ नहीं हो सका है कि युद्ध को रोकने के लिए किसी नए समझौते पर सहमति बन पाएगी या नहीं।
दोनों पक्षों के कड़े रुख को देखते हुए आने वाले दिन वैश्विक सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार के लिहाज से बेहद नाजुक माने जा रहे हैं।
![]()
