इस धरती पर समय-समय पर महापुरुषों, अंशावतारियों, रसूलों-पैगम्बरों, एण्जल्स-प्रॉफेट्स आदि उसी ‘एक’ सर्वोच्च शक्ति-सत्ता रूप खुदा-गॉड-भगवान द्वारा इस धरती पर भेजे जाते रहे हैं जो परिस्थिति के अनुसार जन समाज को उस सर्वोच्च शक्ति-सत्ता के तरफ मोड़ते रहे हैं । उन महापुरुषों द्वारा विभिन्न भाषाओं में एवं विभिन्न समयों में विभिन्न शब्दों से उस एक ही परमपुरुष रूप सर्वोच्च शक्ति-सत्ता को पुकारा जाता रहा है । परमात्मा-परमेश्वर-खुदा-गॉड- भगवान-सत्सीरी अकाल एक ॐकार-सत्पुरुष-परमपुरुष-अकालपुरुष-बोधिसत्त्व-अरिहंत, यहोवा-अहूरमजदा-कुलमालिक आदि-आदि शब्दों से उसी परमप्रभु रूप सर्वोच्च शक्ति-सत्ता के तरफ इंगित किया जाता है । वह एकमात्र ‘एक’ ही है । प्रॉफेट्स-पैगम्बर-अंशावतारी आदि उसी ‘एक’ का बनने और बने रहने की बातें समाज में रखते हैं किन्तु आज समाज उनके बताये गये विधानों को न अपनाकर उस ‘एक’ खुदा-गॉड-भगवान का न बनकर अपने अगुवाओं का मात्र बनकर अलग-अलग गुट बनाने में लगे हैं । अब यदि वे अपने अपने बडप्पनबाजी में तनाव-टकराव पैदा करते है तो इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं है और यदि सरकार भाई-चारा और शान्ति-व्यवस्था लाने में अपने सारे प्रयास को विफल हुआ पा रही हो तो इसमें कोई अनहोनी बात नहीं है ।
यह स्थिति हो गयी है आज के विश्व समाज की । ये सभी जुट गये हैं अपने-अपने बडप्पन और श्रेष्ठत्त्व को उजागर करने में । ईरान, बांग्लादेश, इजरायल आदि आदि देशों में जो तनाव, टकराव व संघर्ष या विघटन दिखाई दे रहा है सब ऐसे ही बडप्पनबाजी का ही तो परिणाम है ।
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