वहीं अरुणाचल प्रदेश की राजधानी ईटानगर में प्रधानमंत्री ने 5,100 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं की नींव रखी। इसमें तातो-1 और हीओ जैसी बड़ी पनबिजली परियोजनाएं शामिल हैं, जिनसे अरुणाचल प्रदेश भारत का बिजली उत्पादन केंद्र बनने की ओर बढ़ेगा। तवांग में बनने वाला सम्मेलन केंद्र पर्यटन और सांस्कृतिक गतिविधियों को गति देगा। इसके अलावा कैंसर संस्थान, नई सड़कें, महिला छात्रावास और अग्निशमन केंद्र जैसी परियोजनाएं सीधे जनता के जीवन स्तर को छूती हैं। मोदी ने कहा कि यह सब “डबल इंजन सरकार के डबल बेनिफिट” का उदाहरण है।
हम आपको बता दें कि केंद्र और राज्य सरकारों के सहयोग से आज पूर्वोत्तर में सड़क से लेकर स्वास्थ्य तक, ऊर्जा से लेकर शिक्षा तक, हर क्षेत्र में काम की गति तेज हुई है। परिणामस्वरूप यह इलाका अब पिछड़ेपन के बजाय अवसरों की नई प्रयोगशाला बनता जा रहा है। देखा जाये तो त्रिपुरा और अरुणाचल की ये यात्राएं यह स्पष्ट करती हैं कि पूर्वोत्तर अब सिर्फ़ सीमावर्ती भूगोल नहीं है, बल्कि भारत की आर्थिक और सांस्कृतिक प्रगति का नया इंजन है। धार्मिक धरोहर की रक्षा और आधुनिक अवसंरचना का निर्माण, दोनों को समान महत्व देकर मोदी सरकार इस क्षेत्र को “भारत के उदयमान पूर्व” के रूप में गढ़ रही है। बहरहाल, यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि पूर्वोत्तर में अब एक नए युग का सूत्रपात हो चुका है— जहाँ परंपरा भी सुरक्षित है और विकास भी सुनिश्चित।
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