भारत में सांप्रदायिक हिंसा 2025:- गिरावट के आंकड़े,गहरी होती सामाजिक दरारें और लोकतंत्र के सामने नई चुनौती हिंसा का स्वरूप बदलना,अधिक विकेंद्रित, अनियोजित, व्यक्तिगत या भीड़-आधारित होना,समाज के भीतर गहरे अविश्वास और नफरत की निरंतर मौजूदगी को दर्शाता है- एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र गोंदिया – 14 जनवरी 2026 को दिल्ली में आयोजित पोंगल महोत्सव के मंच से भारतीय प्रधानमंत्री का यह कथन कि राष्ट्र निर्माण में किसानों का महत्वपूर्ण योगदान है,केवल एकसांस्कृतिक या औपचारिक वक्तव्य नहीं था, बल्कि यह भारत की आत्मा, अर्थव्यवस्था और सामाजिक संरचना की ओर…
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