डॉ मधुछन्दा चक्रवर्ती अध्यापिका बैंगलोर, कर्नाटक शिक्षक शब्द सुनते ही हमारे मन में एक ऐसे व्यक्ति की छवि उमड़ती है जो हाथ में पुस्तक लिए छात्र-छात्राओं का मार्गदर्शन करता है, उन्हें नई दिशा देता है और उनके व्यक्तित्व का निर्माण करता है। एक शिक्षक केवल ज्ञान का स्रोत नहीं, बल्कि विद्या और संस्कार का प्रतीक होता है। परंतु वर्तमान समय में देखा जाए तो आज की शिक्षा व्यवस्था की वास्तविकता इससे काफी अलग नजर आती है। आज का शिक्षक इस प्रणाली का एक ऐसा मजदूर बनकर रह गया है, जिसके…
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