व्यंग्य : दर्शक, कमाई और पहचान हिंदी की,  सितारों की जुबान अंग्रेजी…

संजय एम तराणेकर) अपनी हिंदी की तो बात ही निराली है। जिस देश में हिंदी फिल्मों के कलाकार हिंदी में अभिनय करके करोड़ों कमाते हैं, उसी देश में इंटरव्यू देने बैठते ही उनकी हिंदी अचानक छुट्टी पर चली जाती है और अंग्रेज़ी नौकरी पर हाज़िर हो जाती है। फिल्म हिंदी की, संवाद हिंदी के, दर्शक हिंदी वाले, तालियाँ हिंदी में…लेकिन जैसे ही कैमरा इंटरव्यू के लिए घूमता है—“Well… I think… basically… you know…”और दर्शक सोचता रह जाता है-भाई, फिल्म में तो तुम हिंदी बोल रहे थे, यहाँ कौन-सी फिल्म चल…

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हिंदी का सम्मान ही भारतीय भाषाओं और संस्कृति की असली ताकत

लेखक डॉ. ब्रह्मानंद राजपूत हिंदी केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारत की आवाज, भावनाओं और सामाजिक-सांस्कृतिक एकता की महत्वपूर्ण कड़ी है। देश के करोड़ों लोगों के बीच संवाद का माध्यम बनने वाली हिंदी ने भारतीय समाज को एक सूत्र में बांधने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। हिंदी का विकास संस्कृत से हुआ और संस्कृत भारतीय ज्ञान परंपरा की एक समृद्ध आधारशिला रही है। लेकिन विडंबना यह है कि आज अपनी ही भाषाओं के बीच हिंदी और संस्कृत को वह सम्मान और स्थान नहीं मिल पा रहा, जिसके वे हकदार हैं।…

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भगवान गणेश: प्रथम पूज्य ही नहीं, आदर्श पथ-प्रदर्शक भी

डॉ. राघवेंद्र शर्मा गणेश चतुर्थी के पावन अवसर पर जब संपूर्ण सृष्टि विघ्नहर्ता, प्रथम पूज्य भगवान श्री गणेश के स्वागत में लीन होती है, तब केवल उत्सव मनाना पर्याप्त नहीं है। सच्चा उत्सव तब सार्थक होता है जब हम भगवान गणेश की दिव्य कार्यशैली, उनके स्वरूप और आचरण के पीछे छिपे जीवन-दर्शन को अपने भीतर उतारें। आज के घोर कलियुग में, जहाँ मानवीय संवेदनाएं क्षीण हो रही हैं और भौतिकता का बोलबाला है, भगवान गणेश का प्रत्येक कार्य हमें जीने की श्रेष्ठ राह दिखाता है। भगवान श्री गणेश की सबसे…

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ब्रिक्स सम्मेलन: ईरानी और भारतीय संस्कृति की स्मृतियों का संगम

ओंकारेश्वर पाण्डेय नई दिल्ली के ब्रिक्स सम्मेलन ने एक बार फिर भारत और ईरान के सभ्यतागत संबंधों को पुनर्जीवित और ऊर्जावान कर दिया। भारत मंडपम में लगे ब्रिक्स बाजार में स्थित ईरान पवेलियन केवल हस्तशिल्प, कलाकृतियों और पारंपरिक प्रतीकों का प्रदर्शन-स्थल नहीं था। वह उस ऐतिहासिक स्मृति का जीवंत संकेत है, जिसमें भारत और ईरान ने एक-दूसरे को केवल पड़ोसी या व्यापारिक साझेदार के रूप में नहीं, बल्कि सहस्राब्दियों से संवादरत दो सभ्यताओं के रूप में देखा है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान की पुत्री ज़हरा पेज़ेश्कियान और उनके पति…

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शक्ति का संयम और बुद्धि का विवेक हैं भगवान गणपति

डॉ.दीपक गोस्वामी गणेश को समझना केवल एक देवता को समझना नहीं है, यह मनुष्य के भीतर छिपी उस शक्ति को समझना है जो बुद्धि को विवेक देती है, सामर्थ्य को दिशा देती है और सफलता को लोकमंगल से जोड़ती है। संसार में बुद्धिबल है, धनबल है, बाहुबल है, पदबल है और जनबल है, लेकिन इन सबका मूल्य तभी है जब इनके साथ विवेक और संतुलन हो। यही वह भाव है जिसे हम व्यापक अर्थ में गणेश बल कह सकते हैं। बुद्धि हो और विवेक न हो तो बुद्धिमत्ता अहंकार बन…

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अपने घर से बेघर हिंदी

– शिक्षाविद उदयराज मिश्र फ्रांस के प्रसिद्ध लेखक अलफांसे दौडेत के अनुसार मातृभाषा एक प्रकार से दासता के विरुद्ध स्वाधीनता की चाभी होती है,जो राष्ट्र अपनी भाषा का सम्मान और संवर्धन नहीं करता है,वह पराधीन हो जाता है।इसी तरह भारतेंदु हरिश्चंद्र जी ने भी अपनी भाषा की उन्नति को सभी प्रकार की उन्नतियों का मूल कहकर हिंदी के संवर्धन की बात कही है।किंतु आज जिस तरह से महाराष्ट्र,कर्नाटक,आंध्रप्रदेश और तमिलनाडु की प्रांतीय सरकारें हिंदी का अपमान और विरोध कर रही हैं,तथा हिंदी भाषाभाषी प्रांतों में जिस तरह से अंग्रेजियत को…

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एक दिवस में क्यों बंधे, हिंदी का अभियान

“एक दिवस में क्यों बंधे, हिंदी का अभियान। रचे-बसे हर पल रहे, हिंदी हिंदुस्तान।।” — डॉ. प्रियंका सौरभ हिंदी दिवस केवल एक औपचारिक उत्सव बनकर न रह जाए, बल्कि हिंदी हमारी चेतना, व्यवहार और जीवन का स्थायी हिस्सा बने—यही इस दिवस की सार्थकता है। भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं होती, बल्कि वह संस्कृति, परंपरा, संवेदना और आत्मगौरव की पहचान भी होती है। इसलिए हिंदी का सम्मान किसी एक दिन तक सीमित नहीं किया जा सकता। यदि हम अपने घर, शिक्षा, तकनीक, प्रशासन और कार्यस्थल पर हिंदी को सहजता से…

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हिंदी दिवस: उत्सव नहीं, भाषा के भविष्य का संकल्प

डॉ. सत्यवान सौरभ हर वर्ष 14 सितंबर को मनाया जाने वाला हिंदी दिवस हमारे संवैधानिक इतिहास, भाषायी विविधता और सांस्कृतिक स्मृति से जुड़ा महत्वपूर्ण अवसर है। 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने देवनागरी लिपि में लिखी हिंदी को संघ की राजभाषा के रूप में स्वीकार किया था। संविधान लागू होने के बाद इस निर्णय को अनुच्छेद 343 में स्थान मिला। इसी ऐतिहासिक घटना की स्मृति में 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाया जाता है। लेकिन हिंदी दिवस का अर्थ केवल इतना नहीं होना चाहिए कि इस दिन हिंदी के…

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गणेश उत्सव : मूलाधार से आत्मचेतना तक गणेशतत्व की यात्रा

वीरेंद्र हीरालाल पथरिया स्वतंत्र लेखक गणेश उत्सव के पावन पर्व पर हम भगवान श्री गणेश की तरह-तरह से वंदना करते हैं। कहीं सुंदर प्रतिमा स्थापित होती है, कहीं पूजा-पाठ और आरती होती है, तो कहीं भव्य सजावट और धार्मिक आयोजन किए जाते हैं। निश्चित रूप से यह हमारी श्रद्धा और आस्था का प्रतीक है। लेकिन क्या केवल बाहरी पूजा से ही गणेश जी प्रसन्न हो जाएंगे? शायद नहीं। सच्ची गणेश उपासना तब होगी, जब हम उनके गुणों को अपने जीवन में उतारने का प्रयास करेंगे। भारतीय आध्यात्मिक परंपरा में भगवान…

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भारत के दस प्रमुख गणेश मंदिर

अंजनी सक्सेना भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा में भगवान श्री गणेश प्रथम पूज्य देव हैं। किसी भी मांगलिक कार्य, यज्ञ, अनुष्ठान या नए व्यवसाय के शुभारंभ से पूर्व विघ्नहर्ता श्री गणेश का आह्वान अनिवार्य माना जाता है। भारत के कोने-कोने में गणपति बप्पा के अनगिनत मंदिर स्थापित हैं, लेकिन कुछ मंदिर अपनी प्राचीनता, चमत्कारी मान्यताओं, वास्तुकला और अगाध जन-आस्था के कारण विशेष स्थान रखते हैं। *श्री सिद्धिविनायक मंदिर (मुंबई, महाराष्ट्र)*              ​मुंबई के प्रभादेवी इलाके में स्थित सिद्धिविनायक मंदिर भारत के सबसे प्रसिद्ध और समृद्ध…

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