पुस्तक समीक्षा सजग करती है “ज्योतिष : जीवन पथ का विज्ञान”

डॉ. विवेकानंद उपाध्याय वरिष्ठ स्तम्भकार (देवरिया) भारतीय ज्ञान-परंपरा में ज्योतिष केवल भविष्य जानने की जिज्ञासा का विषय नहीं रहा है। यह काल, प्रकृति, कर्म, मानव-जीवन और ब्रह्मांडीय व्यवस्था के पारस्परिक संबंधों को समझने वाली एक विस्तृत ज्ञान-परंपरा है। ज्योतिषाचार्य अरुण कुमार मिश्र की प्रस्तुत पुस्तक “ज्योतिष : जीवन पथ का विज्ञान” इसी व्यापक परिप्रेक्ष्य में ज्योतिष को देखने का प्रयास करती है। लेखक ने इस ग्रन्थ में ज्योतिष को भय, भाग्यवाद और अंधविश्वास से अलग करते हुए जीवन को समझने, समय को पहचानने और कर्म के प्रति सजग होने की…

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किताब जो फांसी पर भी जिंदा है!

डॉ. विवेकानंद उपाध्याय वरिष्ठ स्तंभकार (देवरिया) दिल से निकलेगी न मर कर भी वतन की उल्फत, मेरी मिट्टी से भी खुशबू-ए-वतन आएगी। ये पंक्तियाँ किसी कवि की कल्पना नहीं, 23 साल के एक युवक के संकल्प का घोषणा-पत्र हैं। जिस उम्र में आज युवा करियर की चिंता में उलझा रहता है, उस उम्र में भगत सिंह ने मौत को प्रेमिका की तरह गले लगा लिया था। आज उनकी जयंती पर हम एक शहीद की याद में मौन रखने नहीं, एक रूपक को समझने बैठे हैं, और वह रूपक है एक…

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लोकतंत्र के आईने में चुनाव बहिष्कार का सच

पंकज श्रीवास्तव मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर चल रहे विवादों और चर्चाओं के बीच एक नया तर्क गढ़ा जा रहा है कि राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस और उनका गठबंधन यह घोषणा करे कि ज्ञानेश कुमार के रहते वे चुनाव नहीं लड़ेंगे, यानी चुनाव का बहिष्कार करेंगे। यह तर्क न तो लोकतांत्रिक है, न ऐतिहासिक कसौटी पर खरा उतरता है। सत्ता पक्ष से असहयोग कोई नई बात नहीं, पर बहिष्कार का हथियार हमेशा उल्टा पड़ा है। 1971 में इंदिरा गांधी बांग्लादेश के अभ्युदय के लिए निर्णायक युद्ध…

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बिहार की बदलती बाढ़ राहत नीति

प्रदीप विद्रोही बिहार में बाढ़ केवल पानी के फैलने की कहानी नहीं है। यह घर छोड़ने, सामान बचाने, पशुओं को सुरक्षित रखने, बच्चों की पढ़ाई रोकने, बीमारी के खतरे और कई दिनों तक अस्थायी ठिकाने पर रहने की मजबूरी की कहानी भी है। इसलिए बाढ़ राहत को केवल इस आधार पर नहीं देखा जा सकता कि कितने परिवारों के खाते में कितनी रकम पहुंची या कितनी थालियां परोसी गईं। असली सवाल यह है कि बाढ़ के दौरान और पानी उतरने तक परिवारों की पूरी सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होती है। इसी…

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बस का रंग नहीं, रूट मायने रखता है

पवन वर्मा आखिरकार बहुत लंबे इंतजार के बाद मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के नाम से सरकारी बस सेवा लौट आयी है। जैसा हमारे राजनीतिक और सामाजिक जीवन में हमेशा होता है वैसा ही अब इस बस सेवा के साथ भी हो रहा है। चौक चौराहों से लेकर राजनीतिक गलियारों तक बस की उम्र और रंग पर बहस शुरू हो गई है। कोई बस को पुरानी बता रहा है, कोई नए रंग को देख रहा है। लेकिन वास्तविकता के धरातल पर सरकारी परिवहन की कहानी बस के रंग…

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बेटी और विरासत के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध मध्य प्रदेश

डॉ. राघवेंद्र शर्मा भारत की भूमि सनातन काल से ही अपनी अनूठी सांस्कृतिक परंपराओं, उच्च मानवीय आदर्शों और अटूट जीवन-मूल्यों के लिए संपूर्ण विश्व में जानी जाती रही है। दुनिया के मानचित्र पर भारत केवल एक भू-भाग या देश मात्र नहीं है, बल्कि यह एक ऐसी जीवित सभ्यता का प्रतिनिधित्व करता है जिसने हमेशा से प्रकृति, मनुष्य और परमात्मा के बीच संतुलन स्थापित करने का संदेश दिया है। आज जब पूरा विश्व बेटियों के अधिकारों, उनके संरक्षण और पर्यटन को बढ़ावा देने के वैश्विक दिवसों को मना रहा है, तब…

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हनुमान अंश पर विरोध, अश्लीलता पर खामोशी क्यों?

डॉ. सत्यवान सौरभ किसी फिल्म, वेब सीरीज या मनोरंजन सामग्री को लेकर समाज में बहस होना कोई नई बात नहीं है। भारत जैसे विविधताओं वाले देश में धर्म, संस्कृति, इतिहास, सामाजिक मूल्यों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़े विषयों पर अलग-अलग मत होना स्वाभाविक है। लेकिन आज एक बड़ा सवाल हमारे सामने खड़ा है कि हमारी आपत्तियाँ क्या समान कसौटी पर आधारित हैं? हाल के दिनों में ‘हनुमान अंश’ फिल्म को लेकर जिस तरह विरोध देखने को मिला, उसने इस सवाल को और गंभीर बना दिया है। यदि किसी फिल्म…

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गिरकर उठना सीख।

बाजों से वह क्यों डरे, चिड़िया रखती पंख। हिम्मत जिसके खून में, टूटे हर इक दंभ।। गिरने का डर छोड़ दे, गिरकर उठना सीख। ठोकर को हथियार कर, खींच जीत की लीक।। झूठी ताकत मत दिखा, सच की अपनी धार। एक अकेला सत्य भी, भारी पड़े हजार।। मंजिल उनको ही मिले, जो लड़ते हर हाल। किस्मत बैठी देखती, कर्म बदलते चाल।। भाग्य भरोसे बैठकर, मत करना अभिमान। कर्मों से जो जीतता, उसका ऊँचा मान।। संकट जितना चीखता, उतना बढ़ता जोर। हिम्मत वाला चुप रहे, फिर करता है भोर।। दुश्मन चाहे…

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प्रज्ञान सौरभ को तीसरे जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ

25 सितंबर 2026 को हमारे/आपके सुपुत्र चि. ‘प्रज्ञान’ का तीसरा जन्मदिन है। इस शुभ अवसर पर प्रिय प्रज्ञान को आकाश भर अनंत शुभकामनाएँ एवं ढेरों आशीर्वाद। ईश्वर की कृपा और आप सभी की दुआएँ सदैव उस पर बनी रहें। वह स्वस्थ, प्रसन्न, संस्कारी एवं ज्ञानवान बने तथा जीवन के हर क्षेत्र में निरंतर आगे बढ़ता रहे। उसके जीवन में ज्ञान का प्रकाश, संस्कारों की सुगंध, सफलता की ऊँचाइयाँ और खुशियों की अनंत धाराएँ सदैव प्रवाहित होती रहें।  *बहुत-बहुत शुभकामना जन्मदिन की बधाइयाँ, करें पुत्र स्वीकार। है सबकी शुभकामना, खुशियाँ मिलें…

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शिक्षा का मजदूर: आज का शिक्षक

डॉ मधुछन्दा चक्रवर्ती अध्यापिका बैंगलोर, कर्नाटक शिक्षक शब्द सुनते ही हमारे मन में एक ऐसे व्यक्ति की छवि उमड़ती है जो हाथ में पुस्तक लिए छात्र-छात्राओं का मार्गदर्शन करता है, उन्हें नई दिशा देता है और उनके व्यक्तित्व का निर्माण करता है। एक शिक्षक केवल ज्ञान का स्रोत नहीं, बल्कि विद्या और संस्कार का प्रतीक होता है। परंतु वर्तमान समय में देखा जाए तो आज की शिक्षा व्यवस्था की वास्तविकता इससे काफी अलग नजर आती है। आज का शिक्षक इस प्रणाली का एक ऐसा मजदूर बनकर रह गया है, जिसके…

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