मेरे साहित्यिक गुरु पंडित मदन गोपाल जी अब इस भौतिक संसार में नहीं हैं, लेकिन उनके लिखे सैकड़ों पत्र आज भी मेरे पास सुरक्षित हैं। वे पत्र जिनमें केवल शब्द नहीं, बल्कि जीवन का ज्ञान, संवेदना और आत्मा की आवाज़ बसी हुई थी। हर सप्ताह वे मुझे प्रेमपूर्वक पत्र लिखते, साहित्य की बारीकियाँ सिखाते और जीवन में ईमानदारी व कर्म की महत्ता समझाते थे। उनके प्रत्येक पत्र में चरित्र की गहराई, भाषा की सादगी और विचार की ऊँचाई होती थी। आज जब उनके छोटे पुत्र सूर्यकांत जी देश के 53वें…
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