(अगस्त 2016 से जन-जन तक: सिवानी मंडी की आवाज़ और जिला पुनर्गठन का प्रश्न, एक नारा, एक विचार और सिवानी के भविष्य का सवाल।) – डॉ. प्रियंका सौरभ लोकतांत्रिक व्यवस्था में प्रशासनिक सीमाएँ पत्थर की लकीर नहीं होतीं। वे जनता की सुविधा, सामाजिक-आर्थिक वास्तविकताओं और क्षेत्रीय संतुलन के अनुरूप समय-समय पर पुनः परिभाषित की जाती हैं। जब कोई प्रशासनिक ढांचा लगातार जनता के लिए असुविधा का कारण बने, तब उसका पुनर्विचार न केवल आवश्यक, बल्कि शासन की संवेदनशीलता की कसौटी भी बन जाता है। सिवानी मंडी उपमंडल को लेकर जिला…
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