“आज़ादी केवल तिथि नहीं, एक निरंतर संघर्ष है। यह सिर्फ़ झंडा फहराने का अधिकार नहीं, बल्कि हर नागरिक को समान अवसर और सम्मान देने की जिम्मेदारी है। जब तक यह जिम्मेदारी पूरी नहीं होती, हमारी स्वतंत्रता अधूरी है।” — डॉ. प्रियंका सौरभ 15 अगस्त 1947 को हमने विदेशी शासन की बेड़ियों को तोड़ दिया था। तिरंगे की फहराती लहरों में वह रोमांच था, जो सदियों की गुलामी और अत्याचार के बाद जन्मा था। हर चेहरे पर एक ही उम्मीद थी—अब अपना देश अपनी मर्ज़ी से चलेगा, अब हर नागरिक को…
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