भारत वर्ष का हर्ष

तुम नमक नहीं, चंदन हो, वीर, हर चौके, छक्के में दिखा दिया धीर। देशभर में फैल गया अद्भुत हर्ष, सदा चमकते रहो हमारे भारत वर्ष। साहस तुम्हारा निखरा यूँ हर पल, चुनौती भी थमी, सूरज गया ढल। दर्शकों के दिलों में बसा भारत वर्ष, गूँजा गगन में तब भारत का हर्ष। खिलाड़ी नहीं केवल, प्रेरणा हो तुम, विश्व ने देखा विजय का तिलक हो तुम। हर रन और कैच में बरसा हर्ष, सारे दिलों में गूँजा अद्भुत भारत वर्ष। नमन है तुम्हें, आज रणवीरों की तरह, विकट परिस्थितियों में शूरवीरों…

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बदला हुआ भारत: क्रिकेट और आत्मसम्मान का नया अध्याय”

“एशिया कप 2025 के फाइनल में भारत का रुख़ और खेल के मैदान से परे राष्ट्रीय गौरव की झलक” एशिया कप 2025 का फाइनल केवल क्रिकेट का खेल नहीं था। भारत ने पाकिस्तान को हराने के साथ ही ट्रॉफी स्वीकार करने से इनकार कर दिया, क्योंकि पुरस्कार देने वाला पाकिस्तान का प्रतिनिधि था। इससे प्रस्तुति समारोह घंटों तक लंबित रहा। इस कदम ने केवल खेल में जीत नहीं दिखाई, बल्कि राष्ट्रीय आत्मसम्मान और राजनीतिक संदेश भी स्पष्ट किया। समर्थक इसे “नए भारत” की शक्ति और साहस मानते हैं, जबकि आलोचक…

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जलते पुतले, बढ़ते रावण: दशहरे का बदलता अर्थ”

पुतलों का दहन नहीं, मन और समाज के भीतर छिपी बुराइयों का संहार ही दशहरे का असली संदेश है।” दशहरे पर रावण के पुतले जलाना केवल परंपरा नहीं, बल्कि बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। लेकिन आज पुतले केवल मनोरंजन बनकर रह गए हैं, जबकि समाज में अहंकार, हिंसा, वासना और अन्य बुराइयाँ लगातार बढ़ रही हैं। असली रावण हमारे भीतर और समाज में मौजूद हैं। यही समय है कि हम अपने मन के रावणों की पहचान करें, उन्हें त्यागें और समाज से अपराध, छल-कपट और अन्य अधर्म…

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घर-घर में रावण*

घर-घर में रावण हुए, चौराहे पर कंस । बहू-बेटियां झेलती, नित शैतानी दंश ।। मन के रावण दुष्ट का, होगा कब संहार । जलते पुतले पूछते, बात यही हर बार ।। पहले रावण एक था, अब हर घर, हर धाम। राम नाम के नाम पर, पलते आशाराम।। बैठा रावण हृदय जो, होता है क्या भान। मान किसी का कब रखे, सौरभ ये अभिमान।। रावण वध हर साल ही, होते है अविराम। पर रावण मन में रहा, सौरभ क्या परिणाम।। हारे रावण अहम तब, मन हो जब श्री राम। धीर वीर गम्भीर को, करे दुनिया प्रणाम।। झूठ-कपट की भावना,  द्वेष छल अहंकार। सौरभ रावण शीश है,…

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प्रज्ञान को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ

25 सितम्बर को हमारे सुपुत्र चि. प्रज्ञान ‘सौरभ’ का दूसरा जन्मदिन है। प्रिय प्रज्ञान को आकाश भर अनन्त शुभकामनाएँ। ईश्वर की कृपा और आप सबकी दुआएँ सदैव हम पर बनी रहें।  शुभकामना-पुष्प  जन्मदिन की बधाइयाँ, करें पुत्र स्वीकार, है सबकी शुभकामना, खुशियाँ मिलें हजार।। बहुत-बहुत शुभकामना, तुमको प्रियवर आज, हो प्रशस्त जीवन सुखद, सुन्दर साज समाज।। जीवन भर मिलती रहें, खुशियाँ सदा अपार, मात शारदे आपके, भरें ज्ञान भण्डार।। शुभ सरिता बहती रहे, जीवन हो सत्संग, घर आँगन खिलते रहें, प्रेम-प्रीति के रंग।। धर्म-कर्म अध्यात्म का, सदा करें उत्थान, लक्ष्य…

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एच-वन-बी वीज़ा विवाद और आत्मनिर्भर भारत का अवसर

(अमेरिकी एच-वन-बी वीज़ा विवाद : भारतीय प्रवासी के लिए संकट, भारत के लिए अवसर) अमेरिका का नया एच-वन-बी वीज़ा शुल्क केवल आप्रवासन नीति का मुद्दा नहीं है बल्कि वैश्विक आर्थिक समीकरणों का संकेतक है। इससे भारतीय प्रवासी समुदाय में असुरक्षा तो बढ़ी है, लेकिन भारत के लिए यह रिवर्स ब्रेन ड्रेन का अवसर भी है। यदि लौटे हुए पेशेवरों के अनुभव, नेटवर्क और तकनीकी दक्षता को सही नीति समर्थन मिले तो भारत के स्टार्ट-अप, अनुसंधान और आत्मनिर्भर भारत अभियान को नई ऊर्जा मिल सकती है। चुनौती को अवसर में बदलकर…

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जाति-मुक्त भारत की ओर इलाहाबाद हाईकोर्ट क़ा ऐतिहासिक आदेश

एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र गोंदिया – भारत में जाति व्यवस्था ने भारतीय राजनीति में आज व्यापक रूप ले लिया है, और ये विवादों की सबसे बड़ी जड़ बन गई है। जातिगत पार्टियों की बहस में अब गवर्नेंस की कमी स्पष्ट होती जा रही है। चाहे यूपी हो या बिहार, कास्ट-बेस्ड पोलिटिकल पहचान डेमोक्रेसी के लिए बड़ी भीड़ जुटाती है, लेकिन शासन प्रशासन के लिए जिम्मेदारी निभाना एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। इस इलेक्शन में सभी पोलिटिकल पार्टीज को चुनौती दी जाती है कि वो कास्ट और रिलिजन…

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नवरात्रि, प्रसाद और पालन-पोषण: आस्था में विवेक का महत्व

नवरात्रि, प्रसाद और पालन-पोषण: आस्था में विवेक का महत्व” (नवरात्रियों का संदेश यही है कि आस्था, संयम और विवेक को एक साथ अपनाया जाए।) नवरात्रि में हलवा-पूरी जैसे पारंपरिक प्रसाद का महत्व है, लेकिन यह केवल इंसानों के लिए ही सुरक्षित है। गाय का पाचन तंत्र इंसानों से भिन्न होता है, इसलिए घी, चीनी और मैदे से बनी चीज़ें उन्हें हानिकारक हो सकती हैं। इस दौरान गायों को केवल हरी घास, भूसा, फल और चारा देना चाहिए। श्रद्धा और सुरक्षा एक साथ चल सकती है। नवरात्रि का उद्देश्य केवल भक्ति…

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रिश्ते में आ गई हैं दूरियां, कहां बिगड़ रही बात, कैसे होगा सुधार?

आज के तेज-रफ्तार दौर में, ज्यादातर लोगों के लिए यह समझना मुश्किल हो रहा है कि उनके रिश्ते क्यों और कहां बिगड़ रहे हैं। रिश्ते में आई दरार के लिए लोग आमतौर पर छोटी-छोटी बातों, बिजी दिनचर्या और हालातों को दोष देते नजर आते हैं, लेकिन समस्या इससे कहीं ज्यादा गहराई में छिपी है। हर दिन जब हम अपने पार्टनर को समय नहीं दे पाते, जाने-अनजाने में उनकी बेइज्जती कर देते हैं और उनके रूठ जाने पर उनसे बात करने की बजाय उन्हें अकेला छोड़ देते हैं। इन सबका नतीजा…

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रसोई से संपादक तक : ‘आयरन लेडी’ संतोष वशिष्ठ की अमर गाथा

(सरलता और संघर्ष की आयरन लेडी, जहाँ माँ का स्नेह, समाज की चेतना और स्त्री-संकल्प की प्रतिमूर्ति साथ-साथ चलती रही।) संतोष वशिष्ठ जी का जीवन संघर्ष और सरलता की अनोखी मिसाल है। उन्होंने रसोई से अपनी यात्रा शुरू की और दैनिक चेतना की संपादक बनकर समाज को दिशा दी। मृदुभाषी, सौम्य और आत्मीय, फिर भी सिद्धांतों पर अडिग—यही उनकी असली पहचान थी। वशिष्ठ सदन को उन्होंने राजनीति और समाज का केंद्र बनाया और चेतना परिवार को माँ की तरह सँभाला। वे सचमुच हरियाणा की ‘आयरन लेडी’ थीं, जिनकी स्मृतियाँ और…

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