तुम नमक नहीं, चंदन हो, वीर, हर चौके, छक्के में दिखा दिया धीर। देशभर में फैल गया अद्भुत हर्ष, सदा चमकते रहो हमारे भारत वर्ष। साहस तुम्हारा निखरा यूँ हर पल, चुनौती भी थमी, सूरज गया ढल। दर्शकों के दिलों में बसा भारत वर्ष, गूँजा गगन में तब भारत का हर्ष। खिलाड़ी नहीं केवल, प्रेरणा हो तुम, विश्व ने देखा विजय का तिलक हो तुम। हर रन और कैच में बरसा हर्ष, सारे दिलों में गूँजा अद्भुत भारत वर्ष। नमन है तुम्हें, आज रणवीरों की तरह, विकट परिस्थितियों में शूरवीरों…
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