देवी पार्वती को अपनी गोद में लेकर मैना हृदय को चीर देने वाला विलाप किए जा रही थी। केवल मैना ही नहीं हिमाचल की लगभग सब स्त्रियां ऐसा ही क्रंदन कर रही थीं। मानो देवी पार्वती जननिहि बिकल बिलोक भवानी। बोली जुत बिबेक मृदु बानी।। अस बिचारि सोचहि मति माता। सो न टरइ जो रचइ बिधाता।। देवी पार्वती बड़ी कोमल वाणी में माता मैना को कर्मों की गति का उपदेश देती हैं। हे माता! कर्मों से भला आज तक कौन जीत पाया है। विधाता ने जो रच दिया, वह कभी…
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