लद्दाख के इंजीनियर, शिक्षा सुधारक और क्लाइमेट एक्टिविस्ट वांगचुक, देश भर में परीक्षाओं में गड़बड़ी और NEET पेपर लीक विवाद के विरोध में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की मांग को लेकर नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। सुले का उनसे मिलना उन विपक्षी नेताओं की बढ़ती सूची में एक और नाम जोड़ता है, जिन्होंने हाल के दिनों में वांगचुक से मुलाक़ात की है, उनकी सेहत पर चिंता जताई है और उनसे हड़ताल खत्म करने का आग्रह किया है। शुक्रवार को कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने भी वांगचुक से मुलाक़ात की और बिगड़ती सेहत को देखते हुए उन्हें अपना उपवास रोकने की सलाह दी।
मुलाकात के बाद X पर एक पोस्ट में खेड़ा ने लिखा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध करना एक संवैधानिक अधिकार है। जब नागरिक अपनी बात रखने के लिए उपवास करते हैं, तो सरकार का फ़र्ज़ है कि वह उनकी बात सुने — न कि नज़रअंदाज़ करे। यही राजधर्म है। उन्होंने पिछली सरकारों का ज़िक्र करते हुए कहा कि 1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और 2011 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली UPA सरकार ने मतभेदों के बावजूद प्रदर्शनकारियों से बातचीत की थी।
गुरुवार को दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) के संयोजक अरविंद केजरीवाल और समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव उन विपक्षी नेताओं में शामिल थे जिन्होंने वांगचुक से मुलाक़ात की और उनके प्रति एकजुटता ज़ाहिर की। 17 जुलाई को सुबह 9:30 बजे तक वांगचुक का स्वास्थ्य सूचकांक बताता है कि उनका वजन 56.55 किलोग्राम था, जो 24 घंटों में 350 ग्राम कम हो गया था। उनका रक्तचाप 108/68, रक्त शर्करा 70 मिलीग्राम/डेसीलीटर और नाड़ी दर 72 प्रति मिनट थी।
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