प्रयागराज, 17 जुलाई।
उ0 प्र0 राजर्षि टण्डन मुक्त विश्वविद्यालय, प्रयागराज का 21वां दीक्षान्त समारोह शुक्रवार को सरस्वती परिसर स्थित अटल प्रेक्षागृह में आयोजित किया गया। दीक्षान्त समारोह की अध्यक्षता उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं कुलाधिपति माननीया श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने की। मुख्य अतिथि पद्मश्री मालिनी अवस्थी, प्रख्यात भारतीय शास्त्रीय एवं लोक गायिका ने दीक्षान्त उद्बोधन दिया। कैबिनेट मंत्री श्री नन्द गोपाल गुप्ता ‘‘नन्दी’’, उच्च शिक्षा मंत्री श्री योगेंद्र उपाध्याय तथा श्रीमती रजनी तिवारी, उच्च शिक्षा राज्यमंत्री, उत्तर प्रदेश सरकार विशिष्ट अतिथि के रूप में दीक्षान्त समारोह में शामिल हुये।
21वें दीक्षान्त समारोह में विभिन्न विद्याशाखाओं में सर्वाधिक अंक प्राप्त करने वाले शिक्षार्थियों को 26 स्वर्ण पदक प्रदान किये गयें, जिनमें 20 स्वर्ण पदक छात्राओं तथा 06 स्वर्ण पदक छात्रों की झोली में गये। दीक्षान्त समारोह में सत्र दिसम्बर-2025 तथा जून-2026 की परीक्षा के सापेक्ष उत्तीर्ण 30886 शिक्षार्थियों को उपाधि प्रदान की गयी, जिसमें 17778 पुरूष तथा 13098 महिला शिक्षार्थी रहे। इस अवसर पर राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल के कर कमलों से उपाधियों एवं अंक प्रमाणपत्रों को डिजीलॉकर में अपलोड कर प्रसारित किया गया। दीक्षान्त समारोह भारतीय पारम्परिक परिधान में आयोजित किया गया।
इस अवसर पर मुक्त विश्वविद्यालय, प्रयागराज के 21वें दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता करते हुए उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय की कुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने कहा कि शिक्षा केवल उपाधि प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का सबसे प्रभावी साधन है। उन्होंने विद्यार्थियों का आह्वान किया कि वे अपनी शिक्षा का उपयोग केवल रोजगार तक सीमित न रखें, बल्कि समाज की समस्याओं के समाधान, नवाचार और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएँ। राज्यपाल ने इस उपलब्धि पर सभी विद्यार्थियों को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि विश्वविद्यालय ने उन लाखों लोगों तक शिक्षा पहुँचाने का सराहनीय कार्य किया है, जो किसी कारणवश अपनी नियमित शिक्षा पूरी नहीं कर सके। उन्होंने विशेष प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि इस वर्ष सम्मानित 18 मेधावी विद्यार्थियों में 12 छात्राएँ और 6 छात्र हैं। यह उपलब्धि नए भारत में नारी शक्ति की बढ़ती भागीदारी और उत्कृष्टता का सशक्त प्रमाण है। उन्होंने कहा कि जब बेटियाँ अवसर प्राप्त करती हैं तो वे प्रत्येक क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर देश और समाज का गौरव बढ़ाती हैं। राज्यपाल ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रारम्भिक शिक्षा मातृभाषा में उपलब्ध कराने तथा कक्षा 6 से ही कौशल विकास आधारित शिक्षा प्रारम्भ करने का उद्देश्य विद्यार्थियों को व्यवहारिक, आत्मनिर्भर और रोजगारोन्मुख बनाना है। उन्होंने कहा कि शिक्षा को केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं रखा जा सकता, बल्कि उसे जीवन कौशल, नवाचार और सामाजिक उत्तरदायित्व से जोड़ना समय की आवश्यकता है।
उन्होंने अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के विद्यार्थियों की शिक्षा को प्रोत्साहित करने के लिए स्थापित अटल विद्यालयों का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे प्रयास शिक्षा में समान अवसर सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। राज्यपाल ने विश्वविद्यालय द्वारा उपाधियों को डिजिलॉकर के माध्यम से उपलब्ध कराने की सराहना करते हुए कहा कि इससे समय, धन और संसाधनों की बचत हो रही है। उन्होंने बताया कि प्रदेश के विश्वविद्यालयों में समर्थ पोर्टल के प्रभावी उपयोग से अब तक लगभग 200 करोड़ रुपये की बचत हुई है, जो डिजिटल सुशासन का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने विद्यार्थियों से पर्यावरण संरक्षण और पारिवारिक मूल्यों को जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाने का आह्वान करते हुए कहा कि प्रत्येक विद्यार्थी अपनी माता के नाम पर कम से कम एक पौधा अवश्य लगाए। यह न केवल पर्यावरण संरक्षण का संदेश देगा, बल्कि माता-पिता के प्रति सम्मान और कृतज्ञता की भावना को भी सुदृढ़ करेगा। राज्यपाल ने समाज में बेटा-बेटी के बीच किसी भी प्रकार के भेदभाव को समाप्त करने पर बल देते हुए कहा कि आज भी अनेक परिवार पुत्रों को निजी विद्यालयों में पढ़ाते हैं, जबकि पुत्रियों को सरकारी विद्यालयों में भेजते हैं।
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