सनातन संस्कृति में दाम्पत्य जीवन को सर्व सुख द्वार समझा जाता है और स्त्री-पुरूष के मिलन को सात जन्मों के सम्बन्ध का पुनर्मिलन करार दिया जाता है। लेकिन कई बार दोनों युगल जोड़ियों के व्यक्तिगत अहंकार से या पारिवारिक नासमझी वश जो दिल में दरार पैदा हो जाती है और लड़ाई-झगड़े एवं पारस्परिक लांछन की शुरुआत से सम्बंध विच्छेद यानी तलाक तक पहुंच जाती है, वह एक ऐसा वियोग होता है जो सम्बन्धित युगल जोड़ियों को ताउम्र एकांत में चूभती है। वहीं, लोग इसे अपनी किस्मत मानकर समझौता तो कर…
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