भारत की लोकपरंपराएँ केवल पर्व-त्योहार नहीं होतीं, वे समाज की सामूहिक स्मृति, प्रकृति-बोध और जीवन-दर्शन की जीवित अभिव्यक्तियाँ होती हैं। ये परंपराएँ समय के साथ बदलती जरूर हैं, लेकिन अपने मूल में वे मनुष्य और प्रकृति के रिश्ते को सहेज कर रखती हैं। उत्तर भारत में मनाया जाने वाला लोहड़ी ऐसा ही एक लोकपर्व है, जो सर्दियों की विदाई और वसंत के स्वागत का प्रतीक बनकर सामने आता है। यह पर्व केवल मौसम के बदलने की सूचना नहीं देता, बल्कि जीवन-दृष्टि के बदलते अध्याय की घोषणा करता है—जहाँ ठिठुरन के…
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